सूर्य पूजन
सूर्य पूजन सामग्री
लाल रंग के चावल ( कुमकुम या रक्तचंदन से मिश्रित )
लाल रंग के पुष्प
सौरमंडल में सूर्यदेव का स्थान बिलकुल केन्द्र में है |
इनकी पूजा आराधना
रविवार के दिन प्रातःकाल की जाती है |
इससे शारीरिक और मानसिक विकास होता है |
पूजा आराधना के बाद सूर्यदेव की सामग्री का दान करें |
सूर्य के उपवासधारी दोपहर के बाद भोजन में मीठे का प्रयोग करें |
सूर्यास्त के उपरांत कुछ भी खाना पीना मना है |
सोमवार को प्रातःकाल सूर्यार्घ्य देने के बाद व्रत सम्पूर्ण करें |
|| आह्वान मंत्र ||
लाल चावल एवं लाल पुष्प लेकर अग्रलिखित मंत्र द्वारा सूर्यदेव का आह्वान करें,
ॐ आकृष्णेन रजसा वर्तमानो निवेशयन्न मृतंमर्त्यंच |
हिरण्येन सविता रथेना देवो याति भुवनानि पश्यन् ||
|| स्थापना मंत्र ||
तत्पश्चात निम्नवत मंत्र द्वारा सूर्यदेव की स्थापना करें,
ॐ विश्वानिदर्द सवितर्दरितानि परासुव यद्भद्रं तन्न आसुव |
ॐ भूर्भुवः स्वः कलिंग देशोद्भव काश्यप गोत्र रक्तवर्णाभ सूर्य इहागच्छ
सूर्याय नमः श्री सूर्यम् वाहयामि स्थापयामि ||
लाल पुष्प और लाल रंग के चावल को नवग्रह मंडल में सूर्य के स्थान पर छोड़ दें |
|| ध्यान मंत्र ||
अब निम्नवत मंत्र द्वारा सूर्यदेव का ध्यान करें,
ॐ जपाकुसुम संकाशं काश्यपेयं महाद्युतिम् |
तमोऽरिं सर्वपापघ्नं सूर्यमावाहयाम्यहम् ||
|| सूर्य मंत्र ||
सूर्यदेव के बीज मंत्र तथा तांत्रिक मंत्र निम्नलिखित हैं
जिनकी जप संख्या ७००० है,
ॐ सूं सूर्याय नमः |
ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः |
|| सूर्य यन्त्र ||
सूर्य के यन्त्र में किसी भी ओर से जोड़ने पर योगफल १५ ही आता है |
इसे किसी भी मास के शुक्ल पक्ष के प्रथम रविवार या रवि पुष्य के दिन सूर्योदय
के बाद भोजनत्र पर अनार की कलम और अष्टगंध की स्याही द्वारा निर्मित करें |
फिर धूप, दीप एवं लाल सुगंधित पुष्प चढ़ाकर
ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः मंत्र का उच्चारण करके स्वर्ण की तावीज या काले वस्त्र में धारण करें |
|| सूर्य दान ||
सूर्यदेव की दान सामग्रीगेहूं, गुड़, देशी घी, लालचंदन, लाल पुष्प, लाल वस्त्र, केसर, तांबा एवं मूंगा |
इस दान को रविवार के दिन दक्षिणा के साथ देना चाहिए ||
|| अस्तु ||
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Jyotish